आह्लाद
दुपहरी की बेला थी
अंतस भी था कुछ उचटा उचटा सा
संयमित करना चाहता था निज को
फिर भी न जाने क्यूँ था उखड़ा उखड़ा सा,
विगत स्मृतियों में,
भुलाकर
साहित्य में डुबाकर
सो जाना चाहता था
पुस्तकों की अलमारी के द्वार खोल
खोजने लगा मन चाही पुस्तक,
पढ़ कर जिसे
खो जाना चाहता था |
अंतस भी था कुछ उचटा उचटा सा
संयमित करना चाहता था निज को
फिर भी न जाने क्यूँ था उखड़ा उखड़ा सा,
विगत स्मृतियों में,
भुलाकर
साहित्य में डुबाकर
सो जाना चाहता था
पुस्तकों की अलमारी के द्वार खोल
खोजने लगा मन चाही पुस्तक,
पढ़ कर जिसे
खो जाना चाहता था |
दृष्टी पड़ी अकस्मात
पापा की लिखी पुरानी डायरियों पर
हुक सी उठी
स्पंदित हुईं भावनाएं
चित्रित हुई समस्त घटनाएँ |
पापा की लिखी पुरानी डायरियों पर
हुक सी उठी
स्पंदित हुईं भावनाएं
चित्रित हुई समस्त घटनाएँ |
उठाकर डायरी
पढने लगा
विगत स्मृतियाँ
चलचित्र सी तैरने लगी
हर अक्षर अब भी स्वर्ण सा चमक रहा था
सूखे गुलाब की पंखुड़ी सा महक रहा था |
पढने लगा
विगत स्मृतियाँ
चलचित्र सी तैरने लगी
हर अक्षर अब भी स्वर्ण सा चमक रहा था
सूखे गुलाब की पंखुड़ी सा महक रहा था |
वे मात्र कागज के पन्ने नही थे,
हर पन्ना सम्पूर्ण इतिहास था,
मध्यवर्गीय परिवार के मुखिया के
उत्तरदायित्वों का अहसास था |
हर पन्ना सम्पूर्ण इतिहास था,
मध्यवर्गीय परिवार के मुखिया के
उत्तरदायित्वों का अहसास था |
नयन नीर
बहने लगे
प्रगाढ़ता क्या होती है
हर शब्द कहने लगे
संबंधों के बंधन
कितने सुदृढ़ होते हैं
हम समझने लगे |
बहने लगे
प्रगाढ़ता क्या होती है
हर शब्द कहने लगे
संबंधों के बंधन
कितने सुदृढ़ होते हैं
हम समझने लगे |
उनकी गोद
की ममत्व भरी ऊष्णता
अब भी हो रही थी प्रतीत
लग रहा था
एक
वट वृक्ष के तले
हर आपत्ति से परे
बैठा हूँ सुरक्षित |
की ममत्व भरी ऊष्णता
अब भी हो रही थी प्रतीत
लग रहा था
एक
वट वृक्ष के तले
हर आपत्ति से परे
बैठा हूँ सुरक्षित |
भानु प्रकाश
तेज़ वारिद पटल की गोद में छुप चूका था
रजनीश भी
किरणों की प्रभा भूल
गुम हो चूका था
तब अँधेरे मार्ग पर
ले एक छोटा सा दीपक
आपने मार्ग दिखाया |
तेज़ वारिद पटल की गोद में छुप चूका था
रजनीश भी
किरणों की प्रभा भूल
गुम हो चूका था
तब अँधेरे मार्ग पर
ले एक छोटा सा दीपक
आपने मार्ग दिखाया |
जीवोन्मुख विचार धाराओं को
दे प्रगतीशील आयाम,
जो दिखाया था मार्ग आपने
आज भी प्रशस्त है,
जो कुछ भी हूँ
पापा आपका है बताया|
दे प्रगतीशील आयाम,
जो दिखाया था मार्ग आपने
आज भी प्रशस्त है,
जो कुछ भी हूँ
पापा आपका है बताया|
विडम्बना इतनी है
अल्पायु में
आप छोड़ चले गए
इन निर्बल स्कन्धों पर
भार छोड़ चले गए
उत्तरदायित्वों का
निरंतर चल रहा हूँ
थक कर भी अथक हूँ,
इस विशाल जगत में
सब के साथ हूँ
फिर भी पृथक हूँ,
प्रेरणा आपकी साथ है चल रही
एक दीप्ति सी भी बढ़ रही
मैं भी आगे बढ़ रहा हूँ |
अल्पायु में
आप छोड़ चले गए
इन निर्बल स्कन्धों पर
भार छोड़ चले गए
उत्तरदायित्वों का
निरंतर चल रहा हूँ
थक कर भी अथक हूँ,
इस विशाल जगत में
सब के साथ हूँ
फिर भी पृथक हूँ,
प्रेरणा आपकी साथ है चल रही
एक दीप्ति सी भी बढ़ रही
मैं भी आगे बढ़ रहा हूँ |
















